Dil Ki Aawaaz

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उदास मन

Posted On: 12 Apr, 2014 Junction Forum में

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क्यों कभी कभी होता है मन उदास
सब होते है ,
फिर भी होता नहीं कोई पास ,
अपने आप से भी दूर हम हो जाते है
न देख पाये कोई खुद को हम छुपाते है |
अपनी ही दुनिया में खुद को ढुढते रह जाते है
करे लाख कोशिश फिर भी ये समझ नहीं पाते है,
ये जिंदगी मिली है क्यों?
किस लिए हम आये है ?
जो सत्य में अपना है उससे रहते हम पराये है
भटकते है उस सबको पाने के लिए जिसको छोड़ कर जाना है
याद करते है उनको जिन्होंने एक दिन हमे भुलाना है
जो मिला है उसका शुक्राना नहीं
है जिद्द , जो नहीं है उसको पाना है
वक्त की कीमत बेवक्त समझ में आती है
अपने आप पर खुद को भी हंसी आती है
क्यों बिता दिया जीवन व्यर्थ की बातो मैं
क्या पाया हमने उन मुलाकातों में
मिली पल भर की खुशी
और बीत गया जीवन गम की बरसातों में
क्यों दुनिया की चीज़ो से खुद को जोड़ दिया
क्यों उस रब से नाता तोड़ दिया
जो हर पल साथ निभाता है
और बदले में कुछ नहीं चाहता है
और बदले में कुछ नहीं चाहता है |

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
April 18, 2014

आदरणीया..बहुत सार्थक और शिक्षाप्रद रचना.आपको बधाई और इसी तरह लिखतें रहें,ये शुभकामनाएं.ये पंक्तियाँ मन को भा गईं-क्यों बिता दिया जीवन व्यर्थ की बातो मैं क्या पाया हमने उन मुलाकातों में मिली पल भर की खुशी और बीत गया जीवन गम की बरसातों में क्यों दुनिया की चीज़ो से खुद को जोड़ दिया क्यों उस रब से नाता तोड़ दिया जो हर पल साथ निभाता है और बदले में कुछ नहीं चाहता है

ANJALI ARORA के द्वारा
April 18, 2014

shukriya yougi sarswat ji

ANJALI ARORA के द्वारा
April 18, 2014

shukriya sadguruji

Udai Shankar Srivastava के द्वारा
April 18, 2014

सरलता से मन को पंक्तितों में उत्तर देना ही इस कविता को विशेष बनाती है . एक भाव पूर्ण कविता के लिए साधुवाद .

Udai Shankar Srivastava के द्वारा
April 18, 2014

सरलता से मनोभावों को आप ने सब्दों में पिरो दिया है . एक भाव पूर्ण कविता लिखने के लिए बधाई .

Udai Shankar Srivastava के द्वारा
April 18, 2014

एक भावपूर्ण कविता . मनोभावों को सब्दों में उतार दिया . साधुवाद

Udai Shankar Srivastava के द्वारा
April 18, 2014

एक सरल और सच्ची अभिव्यक्ति . साधुवाद

Udai Shankar Srivastava के द्वारा
April 19, 2014

सरलता के साथ मनोभावों को शब्दों में पिरोना कठिन है | अपने यह बखूबी किया | साधुवाद

ANJALI ARORA के द्वारा
April 19, 2014

shukriya udai shankar ji

Udai Shankar Srivastava के द्वारा
April 19, 2014

किसी तकनीकी खराबी की वजह से मुझे लग रहा था जैसे मेरी प्रतिक्रिया पोस्ट नहीं हो रही है इसी लिए बार बार पोस्ट करता गया | आज देखा तो सारी प्रतिक्रियाएं पोस्ट हो गयी हैं | असुविधा के लिए क्षमा करें |

ANJALI ARORA के द्वारा
May 1, 2014

sukroya yogi ji

ANJALI ARORA के द्वारा
May 1, 2014

sukriya yogi ji


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